आशुतोष त्रिपाठी
वाराणसी। वर्दी का मतलब सिर्फ कानून-व्यवस्था संभालना नहीं, बल्कि जरूरत के वक्त किसी के लिए सहारा बनना भी है। नगवां पुलिस चौकी पर तैनात दारोगा दयाशंकर गुप्ता ने अपने मानवीय व्यवहार से पुलिस की इसी संवेदनशील तस्वीर को सामने रखा।
दरअसल,बुधवार को आंध्र प्रदेश निवासी श्रीनिवास काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन के लिए अपने परिजनों के साथ वाराणसी आए थे। इसी दौरान वह परिवार से बिछड़ गए। अनजान शहर में अकेले और परेशान श्रीनिवास मदद की उम्मीद लेकर नगवां पुलिस चौकी पहुंचे।
मामले की जानकारी मिलते ही दारोगा दयाशंकर गुप्ता ने बिना देर किए उनके परिजनों की तलाश शुरू की। लगातार प्रयासों और विभिन्न माध्यमों से आखिरकार परिवार का पता लगा लिया। इसके बाद श्रीनिवास को सकुशल उनके परिजनों से मिला दिया गया।
अपनों से मिलते ही परिवार के चेहरों पर खुशी लौट आई और आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। दर्द और चिंता से भरा माहौल कुछ ही देर में भावुक खुशी में बदल गया।
दारोगा दयाशंकर गुप्ता ने कहा, “किसी बिछड़े को उसके अपनों से मिलाना किसी भी पुरस्कार से बढ़कर संतोष देता है। जनता की सेवा ही मेरा कर्तव्य और मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।”
दारोगा की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि वर्दी के पीछे एक संवेदनशील इंसान भी होता है, जो जरूरत पड़ने पर कानून के साथ-साथ इंसानियत का फर्ज भी निभाता है।
दारोगा के इस मानवीय कार्य की स्थानीय स्तर पर सराहना हो रही है।
